नांदेड़, एम अनिलकुमार| जब आपको जीवन में दूसरों से घृणा, ईर्ष्या, द्वेष, निंदा का सामना करना पड़ रहा हो तो समझ लें कि आपकी यात्रा आगे बढ़ रही है। बार-बार अपमान, अपशब्द एक प्रकार का जहर है, यहां तक कि देवाधि देव महादेव भी इससे नहीं चूके, शंकर ने भी जब जहर पीया तो वे नीलकंठेश्वरधारी बन गये। इसलिए ऐसे निंदा करने वालों और नफरत करने वालों को नजरअंदाज करें, जब आपकी आलोचना करने वालों की संख्या आपकी प्रशंसा करने वालों से अधिक है। सोचें कि आप सफलता की राह पर हैं। ऐसे विचार पंडित प्रदीपजी मिश्रा ने शिव महापुराण की कथा के छठे दिन खाते हुए उपस्थित श्रध्दालूओ से यह अपील की। कल गुरुवार को शिव महापुराण कथा का समापन होगा और इसलिये यह कथा सुबह 8 बजे से 11 बजे के बीच होगी, इसलिए भक्तों की संख्या में भारी वृद्धि होने की उम्मीद है.

आज प्रारम्भ में पूज्य प्रदीपजी मिश्र ने श्रवणकुमार की कथा का वाचन किया। ऐसा कहा जाता है कि श्रवण शिशु के माता-पिता की आंखें नहीं थीं, लेकिन शिवमहुरण में उल्लेख मिलता है कि इन माता-पिता की आंखें थीं। संतानोत्पत्ति के लिए माता-पिता की अनंत पूजा करने के बाद भी उन्हें संतान प्राप्ति का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ। शिव शंकर से विनती करने पर महादेव ने उन्हें संतान सुख तो दे दिया, लेकिन वे दोनों अंधे हो गए। भगवान शंकर ने कहा कि जिंदगी भर बच्चे का चेहरा नहीं देख पाएगा. पंडितजी ने अपने अंधे माता-पिता की सेवा करने वाले श्रवण बालक की कहानी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि समाज में अपने माता-पिता की सेवा करने वाले बच्चों की संख्या काफी कम हो रही है और उपदेश दिया कि जिस घर में बुजुर्ग माता-पिता की सेवा की जाती है, उस घर के बुजुर्गों को कभी भी वृद्धाश्रम जाने कि नौबत नहीं आता ऐसा उपदेश भी उन्होने किया।

आज उन्हों कहा कि, भगवान शिवजी बहुत भोले हैं, वे अपने भक्त की पीड़ा उनके चेहरे से जान लेते हैं, इसलिए जब उनसे कुछ मांगें तो बार-बार सोचें और उनसे पूछें, अपना स्वार्थ न देखें, विश्व के कल्याण के लिए संकल्प लें, मनुष्य अपना पूरा जीवन बिता देता है दिखावा करने में, शेखी बघारने में, महँगे कपड़े, महँगी गाड़ियाँ, महँगी वस्तुएँ, विलासिता में रहता है, परन्तु उसे इस बात का एहसास नहीं होता कि यह सब एक निश्चित समय के लिए है, मन की शांति, प्रेम, स्नेह, करुणा, संतोष, भक्ति, पूजा मोक्ष का मार्ग. आपकी मनोकामना पूरी होने में चाहे कितना भी विलंब हो, लेकिन शिवजी को जल चढ़ाने का नियम न छोड़ें, इससे एक न एक दिन आपकी पूजा का अक्षय फल अवश्य मिलेगा। भोलेनाथ पर भरोसा रखें.

व्यापार, नौकरी, परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत करें, शिवपिंड पर जल चढ़ाते रहें, विश्वास रखें सफलता मिलेगी। पंडित जी ने भक्तों को संदेश दिया कि ‘कुछ मेहनत हाथ की, बाकी कृपा भोलेनाथ की’ आत्मविश्वास के साथ चलो। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान कृष्ण और भगवान राम को भी सफलता के लिए शिव की पूजा करनी पड़ी थी. छठे दिन सुबह से ही कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। कथा स्थल पर तीनों मंडप श्रद्धालुओं से खचाखच भरे रहे। मण्डप के बाहर भी उससे कई गुना अधिक भक्तों को जहां जगह मिली वहीं बैठ कर कथा सुनते रहे।
